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जल्लीकट्टू को लेकर भावुक हुईं ट्रांसजेंडर कीर्तन, कहा- बैलों के जीतने पर ऐसा लगेगा, जैसे मेरे बच्चे जीते हों

ट्रांसजेंडर कीर्तन आगामी जल्लीकट्टू के लिए अपने बैलों को तैयार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वे जल्लीकट्टू बैलों को अपने बच्चों के रूप में देखती हैं। जब ये बैल विजेता होंगे तो उन्हें उतनी ही खुशी होगी जितनी कि उनके अपने बच्चों के खेल जीतने पर होती है।

मदुरै (तमिलनाडु), एएनआई। मदुरै की एक ट्रांसजेंडर कीर्तन (Keertana) आगामी जल्लीकट्टूउत्सव के लिए आठ बैलों को प्रशिक्षित कर रही हैं। पिछले चार सालों से कीर्तन ने खुद को इस काम के लिए समर्पित कर दिया है। ट्रांसजेंडर समुदाय के दो अन्य सदस्य बैलों के रखरखाव में कीर्तन की मदद कर रहे हैं। जल्लीकट्टू का अभ्यास तमिलनाडु में पोंगल उत्सव के एक भाग के रूप में किया जाता है, जो आमतौर पर जनवरी में होता है।

इससे पहले, जल्लीकट्टू को केवल पुरुषों के लिए एक वीरतापूर्ण खेल के रूप में माना जाता था। इस ‘मिथ’ को खारिज करते हुए, पोट्टापनायूर (मदुरै) के मूल निवासी कीर्तन ने कहा, ‘यह वर्षों से साबित हो चुका है कि लिंग वीरता और उपलब्धियों को परिभाषित नहीं कर सकता है।’

किसी ‘बच्चे’ से कम नहीं हैं बैल

कीर्तन के लिए जल्लीकट्टू बैल किसी ‘बच्चे’ से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरे पास आठ जल्लीकट्टू बैल हैं। हम आगामी जल्लीकट्टू प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए इनको प्रशिक्षित कर रहे हैं। हर कोई पढ़ रहा है और अपने-अपने क्षेत्र में कुछ हासिल कर रहा है, लेकिन मेरी इच्छा जल्लीकट्टू के इस पारंपरिक खेल में हासिल करने की है।’

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