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घटेंगी खाने के तेल की कीमतें:सरकार ने कंपनियों से दाम 10 रुपए कम करने को कहा, सोयाबीन भी 750 रुपए कम हो सकती हैं

आने वाले दिनों में खाने की तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इसका कारण केंद्र सरकार की ओर से तेल कंपनियों को दाम करने के दिए गए निर्देश है। इसके अलावा सोयाबीन की कीमतों में भी गिरावट की संभावना है।

सोयाबीन मौजूदा भाव 6,250 रुपए से 750 रुपए लुढ़ककर 5,500 रुपए प्रति क्विंटल तक आ सकती है। ओरिगो कमोडिटीज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट राजीव यादव के मुताबिक प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में बारिश की वजह से सोयाबीन की कीमतों में गिरावट है।

खाने के तेल की कीमतों में आएगी गिरावट
केंद्र ने बुधवार को खाने के तेल की कंपनियों से इंपोर्टेड पाम, सूरजमुखी और सोयाबीन तेल के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) को तुरंत 10-12 रुपए प्रति लीटर तक कम करने को कहा है। सरकार ने कंपनियों से कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हालिया कमी को देखते हुए कीमतों में बदलाव एक हफ्ते के भीतर दिखना शुरू हो जाना चाहिए।

भारत अपनी खाने के तेल की मांग का लगभग 60% आयात करता है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का घरेलू बाजार पर सीधा असर पड़ता है। अधिकारियों ने कहा कि सभी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि अगले एक सप्ताह में कीमतें कम करने पर सहमत हुए हैं। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

पिछले एक महीने में मूंगफली और वनस्पति को छोड़कर सभी प्रमुख खाने के तेलों की कीमतों में गिरावट आई है। बीते दिनों वित्त मंत्रालय ने भी नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमें कहा गया था कि सालाना 20 लाख टन कच्चे सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-24 में आयात शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बी वी मेहता ने कहा, हमने पहले ही ब्रांडों के आधार पर खुदरा कीमतों में 10-20 रुपए प्रति लीटर की कमी कर दी है। हम उन्हें 10-15 रुपये प्रति लीटर और कम कर देंगे, लेकिन यह रातोंरात नहीं हो सकता, क्योंकि कार्गों एडवांस में बुक किए जाते हैं और प्राइस ट्रांसफर में टाइम लगता है।

1 साल के निचले स्तर पर भाव
विदेशी बाजार में बीते एक हफ्ते में क्रूड पाम ऑयल (CPO) में तकरीबन 28% की गिरावट आ चुकी है और भाव फिलहाल 1 साल के निचले स्तर पर है। क्रूड सोयाबीन ऑयल और सूरजमुखी ऑयल पर आयात शुल्क को खत्म करने, इंडोनेशिया और मलेशिया से CPO और पामोलीन की ज्यादा सप्लाई की उम्मीद, मिलर्स और स्टॉकिस्ट की ओर से सोयाबीन और सरसों की कमजोर मांग और सूरजमुखी ऑयल के आयात में बढ़ोतरी सोयाबीन की कीमतों में गिरावट के प्रमुख कारण के तौर पर निकलकर सामने आए हैं।

मध्यप्रदेश में सोयाबीन की बुआई 70% आगे
राजीव का कहना है कि देश में सोयाबीन की बुआई बढ़ने और मध्यप्रदेश के साथ महाराष्ट्र में बारिश के बीच अनुकूल बुआई की संभावना से कीमतों पर दबाव बना रहेगा। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक किसानों ने चालू खरीफ सीजन में शुक्रवार (1 जुलाई 2022) तक 30.52 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई की है, जो कि एक साल पहले के 30.29 लाख हेक्टेयर की तुलना में 1% ज्यादा है।

देश के दूसरे सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में सोयाबीन की बुआई ने रफ्तार पकड़ ली है और पिछले साल की समान अवधि की तुलना में पिछले हफ्ते तक बुआई में आई 89% की गिरावट के मुकाबले 1 जुलाई तक रकबा सिर्फ 8% पीछे रह गया है। सबसे बड़े उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में पिछले साल की तुलना में अभी तक बुआई 70% आगे चल रही है।

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