

एसआईटी तीन साल से तलाश रही थी:पूर्व विधायक रेलूराम समेत परिवार के 8 लोगों का हत्यारा दामाद मेरठ में बाबा बन छिपा था, एसटीएफ ने एक माह में पकड़ाबरवाला के पूर्व विधायक रेलूराम पुनिया और परिवार के आठ लोगों का हत्यारा संजीव पैरोल से फरार होने के तीन साल बाद मेरठ से गिरफ्तार कर लिया गया। एसटीएफ अम्बाला की टीम उसे एक माह से तलाश रही थी। वह वहां भेष और नाम बदलकर रह रहा था। उसने बाबा का भेष बनाया हुआ था और अपना नाम संजीव की बजाए ओमनंद गिरि बताया था।
एसटीएफ को उसका पहला इनपुट गुजरात के गांधी नगर में होने का मिला था। टीम वहां पहुंची और कई धार्मिक स्थल पर रह रहे साधुओं को उसकी फोटो दिखाई। वहीं एक साधु ने उसकी पहचान की। इसके बाद अगला इनपुट उसके सरहिंद में होने का मिला। वहां पुलिस के पहुंचने से पहले वह निकल गया। इसके बाद वह यूपी में आ चुका था। कुछ दिन हरिद्वार में रहा तो कुछ दिन ऋषिकेश में।
आखिरी इनपुट उसके मेरठ में होने का मिला जहां एसटीएफ डीएसपी कुलभूषण और इंस्पेक्टर निर्मल सिंह ने टीम के साथ रेड की। उसे सोमवार सुबह 3 बजे काबू किया। एसटीएफ ने अब उसे यमुनानगर सीआईए टू को सौंप दिया है क्योंकि उसके फरार होने के मामले में एसआईटी जांच कर रही थी।
सीआईए टू इंचार्ज महरूफ अली ने बताया कि आरोपी को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। कुछ साल पहले अम्बाला सेंट्रल जेल से कुछ कैदियों ने सुरंग बनाकर भागने की कोशिश की थी। इस मामले में भी संजीव शामिल था।
पुलिस को देखते ही सरेंडर कर दिया, बोला, गलती हो गई
इंस्पेक्टर निर्मल सिंह ने बताया कि उनकी टीम जैसे ही मेरठ में उस जगह पर पहुंची जहां पर संजीव रह रहा था तो वह पुलिस को देखकर घबरा गया। उसने तुरंत पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। उसने पुलिस को कहा कि उससे गलती हो गई। पुलिस ने फोटो के साथ उसके चेहरे को मैच किया। इसके बाद पुलिस ने वहीं से उसे हिरासत में ले लिया था। इंस्पेक्टर निर्मल सिंह के अनुसार आरोपी धार्मिक स्थलों के आसपास रहता था। वहीं खाना खाता था और सोता था।
एक बाबा की मदद से एसटीएफ संजीव तक पहुंची: बताया जा रहा है कि एसटीएम की टीम को संजीव तक पहुंचने में एक बाबा ने मदद की। गुजरात में जब टीम पहुंची तो वहां पर एक बाबा को पुलिस ने संजीव की फोटो दिखाई। तब उस बाबा ने उसे पहचान लिया। संजीव ने उसे बताया था कि वह कहां का रहने वाला है। बाबा ने बताया कि यह व्यक्ति यहां पर काफी दिन तक रहा है।
इसके बाद उस बाबा की मदद से आगे सर्च ऑपरेशन चला और एसटीएफ की टीम संजीव तक पहुंच पाई। बताया जा रहा है कि एसटीएफ की टीम ने कई बार गुजरात में चक्कर लगाए और पंजाब व यूपी में भी कई बार गई। पुलिस के अनुसार संजीव फरार रहने के बाद अपने घर एक बार भी नहीं आया।
फर्जी दस्तावेज बनवाकर पैरोल ली थी
कुरुक्षेत्र जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट सुभाष चंद ने शिकायत दी थी कि रेलूराम पुनिया हत्याकांड के दोषी दंपती संजीव और सोनिया कुरुक्षेत्र जेल में हैं। उसने मकान की मरम्मत की बात कहकर पैरोल की अर्जी दी थी। मई में संजीव की पैरोल मंजूर हुई और वह 28 दिन के लिए घर आया था। उसे 31 मई 2018 को जेल में वापस आना था लेकिन वह नहीं आया। उनका कहना है कि संजीव पहले भी पैरोल पर जा चुका है, लेकिन वापस आ जाता था। इस बार वह नहीं आया।
इस शिकायत पर बिलासपुर पुलिस ने 10 जून 2018 को केस दर्ज किया था। संजीव वैसे तो यूपी के सहारनपुर के लक्ष्मणपुरी कॉलोनी का रहने वाला था, लेकिन उसने पैरोल लेते हुए दस्तावेज बिलासपुर के गांव चगनौली के दिए थे। जब वह यमुनानगर जेल में था तो चगनौली निवासी कुलबीर भी जेल में था। वहां से कुलबीर की दोस्ती हुई थी।
इसके बाद कुलबीर बाहर आ गया था लेकिन संजीव उसके संपर्क में रहा। संजीव ने अपनी मां को कुलबीर के घर पर किराए पर रहने के फर्जी दस्तावेज दिखाकर पैरोल अप्लाई की थी। इस मामले में कुलबीर, उसका पिता बलदेव, जमानती जसमेर, अशोक और संजीव के भाई नितिन को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वहीं संजीव पर एक लाख रुपए का ईनाम घोषित किया गया था।
1998 में सोनिया से की थी लवमैरिज
संजीव 1997 में लखनऊ में हुई स्पोर्ट्स मीट में हिस्सा लेने गया था। वहां हिसार के बरवाला के पूर्व विधायक रेलूराम पुनिया की बेटी सोनिया भी गई थी। दोनों के बीच वहां से प्यार शुरू हुआ था। दोनों ने 29 सितंबर 1998 में शादी कर थी।
पारिवारिक विवाद के चलते संजीव और सोनिया ने मिलकर 24 अगस्त 2001 को रेलूराम पुनिया, पत्नी कृष्णा, बेटे सुनील, बहू शकुंतला, बेटी प्रियंका, 4 साल के पोते लोकेश, ढाई साल की पोती शिवानी और डेढ़ महीने की प्रीति की हत्या कर दी थी।
संजीव और सोनिया समेत उसके परिवार के सदस्यों व रिश्तेदारों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 31 मई 2004 को हिसार के जिला सत्र न्यायाधीश ने रेलूराम पूनिया की पुत्री सोनिया और संजीव को फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में कोर्ट ने उसे उम्रकैद में बदल दिया था। सोनिया अभी जेल में है।