

द ग्रेट खली की अकेडमी से ली है ट्रेनिंग:अमेरिका में 26 जनवरी को डब्ल्यूडब्ल्यूई फाइट जीती, अब वापस लौटा शैंकीदिल्ली के रास्ते बंद होने से यूपी के रास्ते आना पड़ा
अमेरिका में डब्ल्यूडब्ल्यूई फाइट जीतकर जगाधरी के शैंकी ने देश का नाम रोशन किया। सोमवार को शैंकी अमेरिका से घर लौट आया। दिल्ली के रास्ते बंद होने से उन्हें यूपी से होकर आना पड़ा। इससे वे कई घंटे देरी से पहुंचे। रात करीब नौ बजे वे अपने घर पहुंचे। अमेरिका में 26 जनवरी को उन्होंने जो फाइट जीती है वहां तक पहुंचने के लिए शैंकी का सफर बेहद पीड़ादायक और रोचक रहा है।
सात फीट लंबे शैंकी के पास उसके लंबाई के अनुसार घर में बेड नहीं था। उसे सोने के लिए बेड पर टेढ़ा लेटना पड़ता था। लेकिन उसके पिता नरेंद्र सिंह बेटे को समझाते थे कि ये ही लंबाई उसे जीवन में सफलता के रास्ते पर ले जाएगी। हुआ भी वही। आज जब फाइट जीत लौटा है तो उनके घर पर बधाई देने दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं। शैंकी अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। उसकी दो बहने हैं।
ट्रेनिंग और डाइट खर्च उठाने को पिता ने किया प्रॉपर्टी का काम
नरेंद्र सिंह पहले एक फैक्ट्री में 10-12 हजार रुपए की नौकरी करते थे। चार साल पहले बेटे ने रात को खली की अकेडमी में फोन कर ट्रेनिंग लेने की बात की। जब एडमिशन के लिए फीस पता की तो बताया गया कि 27 हजार रुपए प्रति माह की फीस होगी और डाइट का खर्च खुद उठाना होगा।
इस तरह से हर माह करीब 50 हजार का खर्च आता था। इस पर नरेंद्र सिंह ने नौकरी छोड़कर प्रापर्टी डीलिंग का काम शुरू किया। तब प्रापर्टी के काम में अच्छा पैसा था। वहां से कुछ पैसे कमाए और शैंकी की ट्रेनिंग पूरी हो पाई। शैंकी ने साल 2010 में महाराजा अग्रसेन कॉलेज से बीकॉम की है।
बेटे के लिए सवा सात फीट लंबा बेड बनवाया : नरेंद्र सिंह
दसवीं तक शैंकी हाइट ज्यादा नहीं लगती थी, लेकिन इसके बाद तेजी से हाइट बढ़ी। घर पर जो बेड था वह भी लेटने के लिए छोटा पड़ गया था। बेटे को टेढ़ा होकर सोना पड़ता था। वहीं न तो बाजार से बेटे के पैर के साइज के जूते मिल पाते थे और न ही कपड़े। कॉलेज में जाते समय बच्चे मजाक करते थे।
बीकॉम करने के बाद बेटे की मुलाना मेडिकल कॉलेज में अकाउंटेंट की नौकरी लग गई थी। वहां सीए और कुछ डॉक्टर्स ने उन्हें कहा कि वह यह नौकरी छोड़कर रेसलिंग में किस्मत आजमाए। उनके कहने पर बेटे ने रेसलिंग करने का फैसला लिया। हालांकि शुरुआत में ट्रेनिंग के दौरान चोटें लगी और उनका मन टूटा। लेकिन परिवार ने हिम्मत दी और वह डब्ल्यूडब्ल्यूई फाइट जीत पाया।