

ईश्वर की नगरी है अयोध्या, स्वर्ग से की जाती है इसकी तुलना
अयोध्या की गणना भारत की प्राचीन सप्तपुरियों में प्रथम स्थान पर की गई है। अथर्ववेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है और इसके संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है।
अयोध्या, एक पवित्र भूमि जिसपर खुद भगवान राम ने जन्म लिया। हिंदू पौराणिक इतिहास में पवित्र सप्त पुरियों में अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची, अवंतिका (उज्जयिनी) और द्वारका को शामिल किया गया है। अथर्ववेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है और इसके संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है। स्कंदपुराण के अनुसार अयोध्या शब्द ‘अ’ कार ब्रम्हा, ‘य’ कार विष्णु और ‘ध’ कार रूद्र का स्वरूप है। जानेंगे आज यहां के इतिहास के बारे में..
अयोध्या नगरी में कई महान योद्धा, ऋषि-मुनि और अवतारी पुरुष हो चुके हैं। भगवान राम ने भी यहीं जन्म लिया था। जैन मत के अनुसार यहां आदिनाथ सहित 5 तीर्थकरों का जन्म हुआ था। अयोध्या की गणना भारत की प्राचीन सप्तपुरियों में प्रथम स्थान पर की गई है। जैन परंपरा के अनुसार भी 24 तीर्थकरों में से 22 इक्ष्वाकु वंश के थे। इन 24 तीर्थकरों में से भी सर्वप्रथम तीर्थकर आदिनाथ के साथ चार अन्य तीर्थकरों का जन्मस्थान भी यहीं हुआ है।