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इजराइली दूतावास के पास धमाके पर बोले एक्सपर्ट:भारत को मामले की तह तक जाना होगा

इजराइली दूतावास के पास धमाके पर बोले एक्सपर्ट:भारत को मामले की तह तक जाना होगा, लेकिन इजराइल-ईरान के झगड़े में पड़ने से बचना चाहिएदिल्ली में इजराइली दूतावास के बाहर हुए कम क्षमता के बम विस्फोट के बाद एजेंसियां इसकी जांच में जुटी हैं। दिल्ली के सबसे सेफ जोन में हुए इस धमाके में भले ही कुछ गाड़ियों के कांच टूटे हों, लेकिन इसकी गूंज अब भारत, इजराइल और ईरान के रिश्तों में सुनाई दे रही है। इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद भी दिल्ली में हुए धमाके की जांच में सहयोग कर रही है। इजराइल और भारत के संबंधों की वर्षगांठ पर हुए इस धमाके को इजराइल ने आतंकी हमला बताया है और इसके पीछे ईरान का हाथ बताया है। इस पूरे घटनाक्रम पर एक्सपर्ट क्या कहते हैं…

अमेरिका की डेलावेयर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ मुकदर खान कहते हैं, ‘ऐसा लगता है कि लो इंटेंसिटी का यह धमाका भारत और इजराइल के बेहतर होते संबंधों के खिलाफ एक मैसेज देने की कोशिश है, लेकिन यह ईरान सरकार या उनकी इंटेलिजेंस एजेंसी का ऑपरेशन नहीं लगता है।’ वे कहते हैं, ‘ईरान के जनरल सुलेमानी ईराक में अमेरिकी हमले में मारे गए थे, ऐसे में उनकी मौत का बदला लेने के लिए भारत में ऑपरेशन का तुक समझ में नहीं आता है। जनरल सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ईरान को अगर कोई ऑपरेशन करना होता तो वे इसे ईराक में ही करते। ईराक और सीरिया में वे अमेरिकी सैनिकों पर लगातार हमले कर भी रहे हैं।’

प्रोफेसर खान कहते हैं, ‘हो सकता है कि इसके पीछे कोई स्थानीय व्यक्ति या ग्रुप हो। लेकिन इसके पीछे उसका क्या मकसद हो सकता है, ये जांच के बाद ही पता चलेगा। अगर ये ईरानी एजेंटों की हरकत है तो बेवकूफाना है, क्योंकि इससे ईरान को कुछ हासिल नहीं होगा। भारत से ईरान के संबंध खराब होंगे और इसके उलट भारत व इजराइल के बीच डिफेंस और इंटेलिजेंस सहयोग बढ़ जाएगा जो ईरान की मुश्किल ही बढ़ाएगा।’

प्रोफेसर खान के मुताबिक, यह धमाका IED के जरिए हुआ है, जिसे बनाना बहुत आसान नहीं है। इसलिए भारतीय एजेंसियों को गंभीरता से जांच कर इस धमाके के जिम्मेदार लोगों तक पहुंचना चाहिए।
अगर ईरान इसके पीछे नहीं, तो फिर कौन है?
इस धमाके की एक अनजान संगठन जैश-उल-हिंद ने भी जिम्मेदारी ली थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसे खारिज कर चुकी हैं। अब सवाल उठता है कि अगर ईरान इसके पीछे नहीं है तो फिर कौन है? ईरान एक शिया मुस्लिम बहुल देश है और इस समय मध्य-पूर्व के सुन्नी देशों से उसके संबंध बहुत खराब हैं। सऊदी अरब उसे एक चुनौती के तौर पर देखता है। जबकि इजराइल और कई सुन्नी अरब देशों के संबंध हाल के महीनों में बेहतर हुए हैं। मध्य-पूर्व में इस समय ईरान, इजराइल के लिए बड़ी चुनौती है।

प्रोफेसर खान कहते हैं, ‘ग्लोबल स्टेज पर शिया और सुन्नियों के संबंध बहुत खराब हैं। ईरान और अरब देश कई जगह आमने-सामने हैं। ईरान को लेकर शिया-सुन्नी देशों के बीच मध्य पूर्व में टकराव हो रहा है।

भारत का शिया समुदाय आमतौर पर शांत रहा है। मध्य-पूर्व के झगड़ों का बहुत असर भारत के शिया मुसलमानों पर अब तक नहीं दिखा है। वे कहते हैं, ‘यदि ईरान ने भारत में किसी गुट की मदद लेकर इस तरह का धमाका किया है तो बहुत संभव है कि इस तरह के स्लीपर सेल शिया समुदाय से हों। इसकी संभावना कम है, लेकिन अगर यह सही है तो इसका मतलब है कि भारत में शिया रेडिकल हो रहे हैं जो कि बड़ी चिंता की बात है।’

ईरान का नाम लेने में कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए
तुर्की के अंकारा की इल्द्रिम यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार और असिस्टेंट प्रोफेसर ओमेर अनस मानते हैं कि दूतावास के बाहर हुए धमाके में ईरान का नाम लेने में कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। अनस कहते हैं, ‘अमेरिका में बाइडेन के जीतने के बाद से इजराइल के लिए चीजें मुश्किल हो रही हैं। राष्ट्रपति बाइडेन ईरान के साथ परमाणु समझौते को बहाल कर रहे हैं। इससे ईरान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जगह मिलेगी। ईरान अपना व्यापार भी शुरू कर पाएगा।भारत और ईरान के संबंध और मजबूत होने जा रहे हैं। ऐसे में ईरान भारत में इस तरह की कार्रवाई कर उससे अपने संबंध खराब नहीं करना चाहेगा, क्योंकि इससे ईरान का ही नुकसान है।’ अनस आगे कहते हैं, ‘भारत नहीं चाहेगा कि पश्चिमी एशिया की उथल-पुथल भारत आए और ईरान- इजराइल का झगड़ा भारत की जमीन पर हो। भारत इस मामले में जो भी कदम उठाएगा, ईरान के साथ अपने संबंधों को जरूर ध्यान में रखेगा।’

जितना भारत के लिए इजराइल जरूरी है, उतना ही ईरान
हाल के सालों में भारत और इजराइल के बीच रिश्ते मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच सुरक्षा और खुफिया सहयोग भी बढ़ा है, लेकिन भारत के लिए ईरान से रिश्ते भी उतने ही अहम हैं। भारत ईरान से तेल खरीदता रहा है। प्रोफेसर अनस कहते हैं, ‘भारत और ईरान के बीच मजबूत रिश्ते हैं और इनर्जी सेक्टर में ईरान भारत के लिए अहम देश है। अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया में भी दोनों देशों का सहयोग बहुत गहरा है। जितना भारत के लिए इजराइल जरूरी है उतना ही ईरान भी है।’

रक्षा मामलों के विशेषज्ञ कोमोडोर उदय भास्कर कहते हैं, भारत को इस धमाके की जांच की तह में जाना चाहिए लेकिन इजराइल और ईरान के बीच के आपसी तनाव में नहीं पड़ना चाहिए। ‘

तो फिर भारत को करना क्या चाहिए? उदय भास्कर कहते हैं, ‘भारत को इसकी गंभीरता से जांच करनी चाहिए। इस तरह का धमाका हुआ है इसका साफ संदेश है कि हमें ऐसे हमले रोकने में अपनी तत्परता बढ़ानी होगी। NIA एक जांच एजेंसी की तरह काम करती है, लेकिन वो ऐसे हमलों की रोकथाम नहीं कर पाती। भारत को ऐसी एजेंसी चाहिए जो इस तरह के हमले होने से पहले ही रोक दे।’

भारत में साल 2012 में भी इजराइली राजनयिक की कार पर हमला हुआ था। जांच में इस हमले के तार भी ईरान से जुड़े थे और ईरानी मीडिया के लिए काम करने वाले भारतीय पत्रकार मोहम्मद अहमद काजमी को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी थी।

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