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Sawan 2023: सावन महीने में करें पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन, हिंदू धर्म में सावन माह का अधिक महत्व है, जानें क्यों है इतना खास

Sawan 2023 सावन महीने में महादेव की भक्ति करने पर घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास रहता है। इस महीने में हर शिव मंदिर में काफी तादाद में भक्तों की भीड़ उमड़ती हैं। इस खास मौके पर शिव के दर्शन और पूजन कर भक्त खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं। सावन में भोलेनाथ के अद्भूत मंदिर का दर्शन करना चाहते हैं तो नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर जा सकते हैं।

नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Sawan 2023: हिंदू धर्म में सावन माह का अधिक महत्व है। इस पूरे महीने भगवान शिव की पूजा करने का विधान है। 4 जुलाई, मंगलवार से शुरू हुआ सावन माह 31 अगस्त को समाप्त होगा। इस बार सावन 2 महीने तक चलेगा। श्रद्धालुओं को इस पवित्र महीने का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस महीने में भगवान शिव की पूजा पाठ करने के साथ मंत्रों का जाप, जलाभिषेक करने से अधिक लाभ मिलेगा।

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भारत में एक से बढ़कर एक शिव मंदिर मौजूद हैं। जहां भक्तों की बड़ी संख्या में भीड़ होती है।  माह में भोलेनाथ के अद्भूत मंदिर का दर्शन करना चाहते हैं, तो नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर का दर्शन जरूर करें। तो आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में कुछ खास बातें।

पशुपतिनाथ मंदिर की आस्था का केन्द्र है। यह मंदिर काठमांडू के देवापाटन गांव में बागमती नदी के तट पर स्थित है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर श्रद्धालुओं को काफी आकर्षित करता है। यहां हर साल हजारों की संख्या में पर्यटकों की भीड़ होती है। सावन माह में हजारों भक्त महादेव का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर में आते हैं। इस मंदिर में भगवान शिव की पंचमुखी मूर्ति है। इस मूर्ति तक पहुंचने के लिए मंदिर में चांदी के चार दरवाजे मौजूद हैं।

यह मंदिर रोजाना सुबह 4 बजे से लेकर रात्रि 9 बजे तक खुलता है। दोपहर और शाम के लिए पट बंद कर दिए जाते हैं। यह मंदिर अपनी सुंदरता से लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता है। कहा जाता है कि पशुपतिनाथ मंदिर का ज्योतिर्लिंग पारस पत्थर के समान है। पशुपतिनाथ ज्योतिर्लिंग को केदारनाथ मंदिर का आधा भाग माना जाता है।

मान्यता के अनुसार भगवान शिव यहां पर चिंकारे का रूप धारण कर ध्यान में बैठे थे। देवताओं ने उन्हें खोजा और वाराणसी वापस लाने का प्रयास किया लेकिन भोलेनाथ ने नदी के दूसरे किनारे पर छलांग लगा दी। इसी दौरान उनका सींग चार टुकडों में टूट गया था। इसके बाद भगवान पशुपति चतुर्मुख लिंग के रूप में इस स्थान पर प्रकट हुए थे। इस मंदिर से जुड़े और भी कई मान्यता हैं। सावन माह में आप भी महादेव के इस भव्य मंदिर के दर्शन करने का प्लान जरूर बनाएं।

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