

टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़े सात साल बीत गए। वनडे और टी-20 में देश की कप्तानी छोड़े पांच साल हो गए। रिटायरमेंट लिए तीन साल हो गए। फिर भी हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी उसे याद करता है और दुआ करता है कि भारत के पास फिर से उसी के जैसा कप्तान हो। बात महेंद्र सिंह धोनी की हो रही है। वे आज 41 साल के हो गए हैं।
इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत के 90 साल के इतिहास में धोनी सबसे कामयाब कप्तान माने जाते हैं। टी-20 वर्ल्ड कप, वनडे वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीतने के अलावा धोनी पहले ऐसे भारतीय कप्तान बने थे, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में देश को नंबर-1 बनाया था।
धोनी ने ऐसी कामयाबी महज संयोग या किस्मत के भरोसे हासिल नहीं की। इसके पीछे उनकी वर्षों की मेहनत, कभी हार न मानने की जिद और सही समय पर सही फैसले करने की क्षमता जैसी कई खूबियां शामिल रहीं। धोनी ने जिन तरीकों से क्रिकेट को जिया, वे तरीके हमें जीवन जीना सिखा सकते हैं। उनके फलसफे हमें अपना लक्ष्य हासिल करने में मददगार हो सकते हैं।