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गोल्ड तक का सफर:नीरज वजन कम करने के लिए गया था जिम, स्टेडियम में पहली बार भाला फेंका तो वहीं से बदल गई जिंदगी

नीरज घर में अकेला बेटा है और दो बहनें हैं। बचपन से ही दादी का लाडला था शरारत करने पर भी दादी उन्हें डांटने नहीं देती थी। दादी उनके खानपान पर विशेष ध्यान देती थी। जब स्कूल से आता था तो दादी एक कटोरे में मलाई लेकर उसमें बूरा या शक्कर मिलाकर उन्हें खिलाती व पास बैठकर एक कटोरा दूध पिलाती थी। इससे वजन इतना बढ़ गया था कि 12 साल की उम्र में 85 किलो वजन हो गया।

फिर उनका वजन कम करने के लिए उनके छोटे चाचा उन्हें मतलौडा जिम में ले गए। वह मन नहीं होने पर भी रोज स्कूल से आकर रोज साइकिल से जिम जाता था। किसी कारण से वो जिम बंद हुई तो शिवाजी स्टेडियम के पास एक जिम में जाने लगा। दिन में खुद जाता था और शाम को हम में से कोई वहां से आता था तो उसे साथ ले आते थे। स्टेडियम में उसके दोस्त बन गए और उन्होंने उसे खेलने को कहा।

बिंझौल के दोस्त जयवीर ने उनसे कई खेल खिलवाए तो उन्हें वो जेवलिन में अच्छा दिखा। फिर जेवलिन की तरफ रुझान हुआ। फिर जिला स्तर की प्रतियोगिता में नीरज ने टॉप किया। उस दिन से उन्होंने खेल को सिरियस लेना शुरू किया। फिर हरिद्वार खेलने गए तो वहां अंडर 16 में रिकॉर्ड बनाया। फिर उन्हें प्रैक्टिस के लिए पानीपत ही छोड़ दिया, लेकिन थ्रो करने के लिए सोनीपत या मधुबन जाना पड़ता था क्योंकि वहां सिंथेटिक ट्रैक था।

ऐसे में सभी दोस्त पंचकूला शिफ्ट हुए। वहां ज्यादातर प्रतियोगिता में टॉप करने लगा। सवा लाख रुपए की एक जेवलिन आती थी, आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। लेकिन पैसों की कमी के चलते खेल नहीं रुकने दिया। सभी ज्यादा काम करने लगे।

नेशनल कैंप से पहले बास्केटबाल खेलते समय रिंग पकड़ा तो पूरे शरीर का वजन आगे चला गया और वह नीचे गिर गया। वहीं पलस्तर करवाया और यहां आते ही फैट बढने लगा। नीरज ने उसे ठीक होने से पहले काट लिया। फिर उन्हें पानीपत लाए और यहीं से उनका इलाज करवाया। करीब 4 माह खेल से दूर रहना पड़ा। फिर कई गुणा मेहनत की और वजन कम किया।

2015 में इंडिया कैंप में हुआ था चयन

2015 में नीरज का इंडिया कैंप में चयन हुआ। पटियाला जाने के बाद कुछ खर्च कम हुए तो थोड़ी राहत मिली। फिर इंटर यूनिवर्सिटी का रिकॉर्ड बनाया। 2016 रियो ओलिंपिक से पहले बुखार होने के चलते थ्रो सही से नहीं कर पाया। क्वालीफाई मार्क 83 मीटर था 82.24 थ्रो लगी। 76 सेंटीमीटर से रह गया। इसके 6 दिन बाद ही पौलेंड में वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेला तो 86.48 मीटर थ्रो के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

सरकार ने ग्रीन कार्ड के माध्यम से ओलिंपिक भेजने की कोशिश की लेकिन मान्य नहीं हुआ। 2018 कॉमनवेल्थ व एशियाड में गोल्ड जीता। मिल्खा सिंह के बाद नीरज ही दूसरा खिलाडी है जिन्होंने एक सीजन में कॉमनवेल्थ और एशियाड में गोल्ड जीता। फिर साउथ अफ्रीका में अभ्यास करते समय कोहनी में फैक्चर हुआ।

मई 2019 में उसका ओपरेशन करवाया। करीब 3 माह अस्पताल में रहा। वहीं से ओलिंपिक क्वालीफाई किया। फिर कोरोना हुआ तो तुर्की में था, वहां से रातों रात वापिस बुलाया। फिर लगातार एक साल पटियाला में रहा। काफी समय खेल से दूर रहा। अब काफी प्रयास के बाद पुर्तगाल भेजा।

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