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आंदोलन का चौथा चरण:संयुक्त मोर्चे की बैठक में कम नेता पहुंचे, कई ने अपनी जगह दूसरों को भेजा

आंदोलन का चौथा चरण:संयुक्त मोर्चे की बैठक में कम नेता पहुंचे, कई ने अपनी जगह दूसरों को भेजा; वार्ता की पहल और महापंचायतों पर मतभेदबॉर्डर के साथ फसल कटाई, किसानों की जमानत, महापंचायतों व भाजपा के विरोध पर फोकस
तीनों कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर जारी आंदोलन चौथे चरण में प्रवेश कर चुका है। संयुक्त किसान मोर्चा ने मंगलवार को कुंडली बॉर्डर पर बैठक की। इसमें एक महीने का प्लान बनाया गया। इसमें बॉर्डर पर आंदोलन के साथ फसलों की कटाई, जेल में बंद किसानों की जमानत कराने, हरियाणा और पंजाब को छोड़कर अन्य राज्यों में महापंचायत करने और चुनावी राज्यों में भाजपा का विरोध करने पर फोकस रहेगा।

बैठक में कुछ सदस्यों का कहना था कि यहां बैठे किसानों में निराशा आ रही है। इसलिए वार्ता का मुद्दा उठाया, जिससे समाधान की तरफ बढ़ा जाए। मोर्चे के सीनियर नेताओं ने इस चिंता को ठीक तो माना, लेकिन साथ ही कहा कि पंजाब में जल्द सरसों की कटाई शुरू होने वाली है और फिर पंजाब, हरियाणा और यूपी में गेहूं की कटाई का समय आ जाएगा। तय हुआ कि किसानों को रोटेशन में बुलाया जाए। बॉर्डर पर हलचल के लिए 6 मार्च को 5 घंटे के लिए केएमपी को अलग-अलग जगहों पर बंद करेंगे।

जानिए अंदर की बात

दबाव और राहत का खेल

सूत्रों के अनुसार कुछ किसान नेता वार्ता शुरू होने के पक्ष में हैं, लेकिन कुछ सदस्यों का मानना है कि वार्ता ऐसे माहौल में की जाए, जब सरकार पर दबाव हो। किसान नेताओं को लगता है कि चुनावी राज्यों में भाजपा का विरोध होगा तो सरकार दबाव में रहेगी। वहीं, पहले जमानत पर किसानों को छुड़ाना चाहते हैं, ताकि सरकार दबाव में रहे व जल्द समाधान की ओर बढ़े। करीब 150 किसानों में से 90 बाहर आ चुके हैं।

मंगलवार को भी 13 को जमानत मिली है। दूसरी ओर मीटिंग में सभी सदस्य नहीं पहुंचे। वहीं कुछ सीनियर सदस्यों ने बैठक में अपनी जगह दूसरे लोगों को भेजा। इससे मोर्चे के कई सदस्यों में नाराजगी थी। कई दिनों से मोर्चे में वार्ता को लेकर मंथन चल रहा है, लेकिन किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सके।

किसान नेता बोले

सरकार कुर्सी पर बैठी, पहले उसकी जिम्मेदारी: यादव

मोर्चे के सदस्य योगेन्द्र यादव ने बताया कि किसान वार्ता को तैयार हैं, लेकिन सरकार इसके लिए कोई प्रस्ताव नहीं भेज रही। सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वो पहल करे और बुलाए।
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि वो महापंचायत के चलते बैठक में नहीं थे। हमने वार्ता करने से कभी मना नहीं किया, लेकिन जिस तरह सरकार चाह रही है वैसे नहीं चलेगा। मोर्चे ने जो निर्णय लिए हैं वो सभी की सहमति से लिए हैं।
संयुक्त मोर्चा सदस्य राजेंद्र ढल्लेवाल का कहना है कि हम वार्ता को हमेशा से तैयार हैं, लेकिन सरकार अपने पुराने प्रस्ताव पर अटकी हुई है। उसको हम दो बार अस्वीकार कर चुके हैं। मोर्चे की बैठक में वार्ता को लेकर चर्चा हुई। सरकार कोई नया प्रस्ताव देती है तो हम वार्ता के लिए जाएंगे।
बहादुरगढ़ में पक्की काॅलोनियां बनाने की तैयारी

बहादुरगढ़, किसानों ने ट्राॅलियों के पंजाब व गांवों में वापस जाने के बाद पक्के मकान बनाने का काम मंगलवार से शुरू कर दिया। किसानों ने ईंटों से मकानों को इस तरह से बनाना शुरू किया कि जैसे गांव में कमरे तैयार किए जाते हैं। जल्द पूरे बाइपास पर जहां-जहां किसानों ने ट्रालियों को खड़ा करके अपने अपने जिले व गांव के नामों से काॅलाेनियां तैयार की हुई है। वहीं पक्के मकान तैयार किए जाने हैं, जिससे किसान यहां कई सालों तक आंदोलन को चला सके।

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