अधिक मास के आखिरी पांच दिन व्रत-पर्व वाले:ये दिन भगवान विष्णु, शिव-शक्ति और पितृ पूजा के लिए खास
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16 अगस्त को खत्म होगा अधिक मास:12 अगस्त को एकादशी, 14 को सावन सोमवार और 16 को रहेगी अमावस्या

व्रत-पर्व के नजरिए से अधिक मास के अंतिम पांच दिन बहुत खास रहेंगे। पांचों दिन अलग-अलग व्रत-उपवास किए जाएंगे। 12 अगस्त को अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। 13 को प्रदोष व्रत, 14 को सावन अधिक मास सोमवार, 15 को मंगला गौरी व्रत और 16 को अधिक मास की अमावस्या रहेगी। अमावस्या पर अधिक मास खत्म हो जाएगा। 17 तारीख से सावन शुक्ल पक्ष शुरू होगा।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, सावन का अधिक मास 19 साल बाद आया है और इसके अंतिम पांच दिन शेष हैं। इन पांच दिनों में किए गए व्रत-उपवास और दान-पुण्य से अक्षय पुण्य मिल सकता है। ऐसा पुण्य, जिसका असर जीवन भर बना रहेगा। जानिए इन पांच दिनों में कौन-कौन से शुभ काम कर सकते हैं…

12 अगस्त को एकादशी है। इस दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत करें। इसके साथ ही शिव जी का अभिषेक भी करें। व्रत करने वाले लोगों को फलों का दान करें।
13 अगस्त को प्रदोष व्रत है। ये व्रत शिव जी और देवी पार्वती के लिए किया जाता है। इस दिन शिव-पार्वती का अभिषेक करें और जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज का दान करें।
14 अगस्त को सावन अधिक मास का सोमवार है। इस दिन उज्जैन के महाकालेश्वर की सवारी निकलेगी। सोमवार को व्रत-उपवास के साथ ही किसी मंदिर में पूजन सामग्री भेंट करें।
15 अगस्त को मंगला गौरी व्रत किया जाएगा। ये व्रत महिलाएं अपने पति और परिवार के सौभाग्य की कामना से करती हैं। इस दिन देवी पार्वती की पूजा करें। किसी महिला को सुहाग का सामान दान करें।
16 अगस्त को अधिक मास की अमावस्या है। इस दिन पितरों के लिए धूप-ध्यान करें। किसी पवित्र में स्नान करें और स्नान के बाद नदी किनारे ही जरूरतमंद लोगों को फल और खाने की चीजें दान करें। किसी गोशाला में हरी घास और गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों की देखभाल करें।
कर सकते हैं ये शुभ काम भी

अधिक मास के अंतिम दिनों में श्रीकृष्ण की अभिषेक करें। इसके लिए केसर मिश्रित दूध का उपयोग करें। दक्षिणावर्ती शंख में दूध भरें और बाल गोपाल को चढ़ाएं। इसके बाद तुलसी मिश्रित जल चढ़ाएं। बाल गोपाल का श्रृंगार करें। तुलसी के साथ माखन मिश्री का भोग लगाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।

हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या रामायण का पाठ करें। हनुमान जी को चोला चढ़ा सकते हैं। ऊँ रामदूताय नम: मंत्र का जप कर सकते हैं।

अधिक मास में भगवान विष्णु की कथाएं पढ़ने-सुनने की परंपरा है। अंतिम दिनों में भागवत कथा, रामायण पढ़ें या सुनें।

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