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IIT थर्ड ईयर का स्टूडेंट 22 की उम्र में तीन एडटेक स्टार्टअप चला रहा है, 22 करोड़ का टर्नओवर है

IIT थर्ड ईयर का स्टूडेंट 22 की उम्र में तीन एडटेक स्टार्टअप चला रहा है, 22 करोड़ का टर्नओवर है; कभी 8 महीने सिर्फ मैगी खाकर बिताए थे22 साल के सौरभ मौर्य वर्तमान में IIT BHU में थर्ड ईयर के स्टूडेंट हैं, जब वो फर्स्ट ईयर में थे तब से स्टार्टअप कर रहे हैं
पापा से छुपाकर मां ने दिए थे 5 हजार रुपए, जिससे सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदा और उससे वो IIT- JEE के स्टूडेंट्स के लिए वीडियो बनाने लगे
आज की कहानी है बनारस के रहने वाले 22 साल के सौरभ मौर्य की। वे अभी IIT BHU में थर्ड ईयर के स्टूडेंट हैं और पैरलल तीन स्टार्टअप चला रहे हैं, जिसका टर्नओवर 22 करोड़ रुपए से ज्यादा का है। सौरभ एक गरीब परिवार में पैदा हुए थे, लेकिन उनके पैरेंट्स के सपनों में गरीबी नहीं थी। उनकी शुरुआती पढ़ाई बनारस से सटे एक छोटे से गांव के एक प्राइमरी स्कूल में हुई। ये स्कूल, उनके घर से से 4 किलोमीटर दूर था और वो पैदल ही स्कूल जाया करते थे।

सौरभ बताते हैं, ‘चूंकि उस वक्त मैं एक छोटे से गांव में रहता था तो मेरे सपने भी बहुत छोटे थे। मैं मार्केट जाता था तो सोचता था कि मेरी भी एक कम्प्यूटर की दुकान हो और मैं लोगों के मोबाइल में गाने भरूं, लेकिन मेरे बड़े पापा और बड़ी मम्मी का सपना अलग था। वो चाहते थे कि मैं बहुत आगे तक पढ़ाई करूं। घरवालों ने हम तीनों भाइयों (मैं, मेरे बड़े भाई और कजिन) को पढ़ाई के लिए बनारस भेजा। मैं बनारस तो आ गया था, लेकिन मेरा मन पढ़ाई में नहीं लगता था।
मुझे आज भी याद है, उस वक्त मैं 11वीं क्लास में था और दोनों भाई 12वीं में और उन दोनों ने IIT का एंट्रेस एग्जाम निकाल लिया। घरवाले चाहते थे कि मैं भी 12वीं के बाद IIT निकालूं, लेकिन मैं तो कम्प्यूटर की दुकान खोलना चाहता था। घरवालों के कहने पर मैंने तैयारी शुरू की, लेकिन मेरा फोकस नहीं था। नतीजतन 12वीं में मेरा JEE क्लीयर नहीं हुआ। मैं उस दिन बहुत रोया, जैसे-तैसे परिवार के सपोर्ट की वजह से मैंने अगले साल ड्रॉप लिया और इस बार दिन-रात नहीं देखा। हॉस्टल की हालत, त्यौहार, कम्प्यूटर, मूवीज, मोबाइल, सोशल मीडिया, सबसे दूरी बना ली। आखिरकार मैंने IIT क्लियर कर लिया।

मैं अपने परिवार के सपनों को पूरा कर चुका था

सौरभ जब नौवीं क्लास में पढ़ते थे तबसे ही वे होम ट्यूशन पढ़ाते थे। जब वो IIT BHU पहुंचे तो देखा कि यहां तो हर कोई अपना एक गोल निर्धारित करके आया है। चूंकि सौरभ कोचिंग पढ़ाया करते थे तो उन्होंने सोचा क्यों न इसी फील्ड में कुछ आगे किया जाए। इसके बाद साैरभ बनारस की लगभग हर कोचिंग में गए और वहां पढ़ाने के लिए जॉब मांगी, लेकिन उनको जवाब मिला कि तुम्हें अभी एक्सपीरियंस नहीं है, इसलिए IIT कम्प्लीट करने के बाद आना।

बोर्ड तक नहीं था, एक हाथ से कॉपी पर लिखता था, दूसरे से मोबाइल पकड़ता था

साैरभ बताते हैं, ‘IIT के बाद मुझे एक अच्छा-खासा पैकेज मिल सकता था, लेकिन मैंने तय किया कि मुझे कुछ अपना ही करना है। साल 2018 में जब मैं फर्स्ट ईयर में था तो मम्मी ने बिना पापा को बताए मुझे 5 हजार रुपए दिए, जिससे मैंने अपने दोस्त से एक सेकेंड हैंड मोबाइल फोन खरीदा, और यहीं से मेरे करियर की शुरुआत हुई। इसके बाद मैंने एक यूट्यूब चैनल शुरू किया, जहां मैं लेक्चर रिकॉर्ड करके अपलोड किया करता था। शुरुआत में मेरे पास बोर्ड तक नहीं था तो मैं एक हाथ से कॉपी पर लिखता था और दूसरे से मोबाइल पकड़ कर वीडियो बनाता था। धीरे-धीरे मैंने पैसे जुटाकर 1300 रुपए का व्हाइट बोर्ड लिया और फिर इस पर ही मैं बच्चों को टिप्स देने लगा।”मैंने वीडियो बनाने में कंसिस्टेंसी ब्रेक नहीं की। गर्मी हो या सर्दी या बरसात, मैंने वीडियो बनाए। एक दिन मैंने अपनी IIT की जर्नी को वीडियो बनाकर अपलोड किया। उस वीडियो पर मैंने एक कमेंट पढ़ा, जिसमें लिखा था- भइया, हमारे पास भी आईआईटियन भइया नहीं है, क्या आप हमारी मेंटरशिप कर सकते हैं। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए मैंने अपना पहला स्टार्टअप शुरू किया। जिसमें मैंने 11वीं, 12वीं के उन बच्चों को गाइडेंस देना शुरू किया जो IIT की तैयारी कर रहे थे।’

‘इसके लिए मैंने 99 रुपए में मेंटरशिप पैक लॉन्च किया। और जब पहला स्टूडेंट मुझसे जुड़ा तो उससे मेरी पहली कमाई हुई। इसके बाद स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ती ही गई और मैं अकेले नहीं संभाल पा रहा था। मैंने अपने बैच के कई साथियों को अपने साथ जोड़ा और उन्हें भी हर स्टूडेंट की मेंटरिंग पर कुछ अमांउट देने लगा। इस तरह हमने वॉट्सऐप के जरिए बच्चों को गाइडेंस देना शुरू किया।’

सौरभ को पढ़ाने का नशा इस हद तक था कि उन्होंने कॉलेज के फर्स्ट ईयर से IIT का हॉस्टल न लेकर बाहर एक छोटा सा कमरा लिया। वो तब से चार घंटे ही सोते हैं। आज तक उन्होंने अपने कॉलेज का कोई कल्चरल फेस्ट या सेलेब नाइट अटैंड नहीं की। 8 महीनों तक उन्होंने सिर्फ मैगी खाकर ही जीवन बिताया। उनके कमरे में एक गर्म केतली थी, जिसमें या तो चाय बनाते थे, या मैगी।

2019 में बनाई कंपनी, पहले ही साल 11 करोड़ का टर्नओवर रहासाैरभ बताते हैं, ‘गाइडेंस के साथ-साथ पता चला कि बच्चों को कोर्स की भी जरूरत है, लेकिन मेरे पास रिसोर्स नहीं थे। इसके बाद हमने 2000 रुपए में ईयर लॉन्ग और क्रैश कोर्स देना शुरू किया जो बच्चों के बहुत काम आए। इसके बाद हमने जनवरी 2019 में एसएसडी एडटेक प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी बनाई और काम शुरू कर दिया। इसमें दो स्टार्टअप एक साथ चलते थे, एक कोर्स में और दूसरा मेंटरिंग में। ये मैंने 1500 रुपए से शुरू किया था और पहले ही साल हमने इस स्टार्टअप से 11 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। इसके बाद हमने बच्चों को हॉस्टल, पीजी, लोन वगैरह उपलब्ध कराने के लिए रैंकर्स कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई। जहां हमनें गाइडेंस, काउंसलिंग, बच्चों के रहने की व्यवस्था, बच्चों के लिए लोन की व्यवस्था पर काम किया।

वे बताते हैं, ‘आज हमारी बनारस में तीन ब्रांच है और एक ब्रांच गाजियाबाद में है। मेंटरशिप के लिए आज हमारे पास 200 से ज्यादा आईआईटियन मेंबर्स जुड़े हुए हैं। 30 से ज्यादा लोग हैं जो डाउट सॉल्विंग करते हैं। 13 टीचर हैं जो पढ़ाते हैं। आज हम हर महीने करीब 45 लाख रुपए के काेर्स सेल कर रहे हैं। हमसे 2700 से ज्यादा स्टूडेंट जुड़े हैं। लॉकडाउन और कोविड के दौरान 1300 स्टूडेंट ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जहां एक ओर कोविड में बाकी बिजनेस ठप हो गए, वहीं ऑनलाइन सिस्टम की वजह से एजुकेशन सेक्टर बूम पर रहा।’

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