

वेदर अपडेट:15 साल बाद जमा अगेता पाला, आज-कल भी जमेगा, हिसार में 1 डिग्री और नारनौल में 1.5 डिग्री रहा रात का तापमान (सुशील भार्गव) पारा जमाव बिंदु पर पहुंच गया है। हिसार में यह 1 डिग्री रहा, जबकि नारनौल में 1.5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से चार डिग्री कम रहा। हिसार में 2005 में 18 दिसंबर को रात का तापमान 0.9 डिग्री रहा था, इसके 15 साल बाद पारा 1.0 डिग्री पर आया है। प्रदेश के कई अन्य जिलों में रात का तापमान चार डिग्री से नीचे ही रहा। कई इलाकों में शुक्रवार को पाला जमा है।
एचएयू हिसार के मौसम विभाग के अध्यक्ष डॉ. एमएल खीचड़ के अनुसार जिस तरह से पारा नीचे आया है, इससे यही लगता है कि प्रदेश में 19 और 20 दिसंबर को कहीं-कहीं पाला जम सकता है। जबकि 10 से 20 किलोमीटर की गति से शीतलहर भी चल सकती है। 20 दिसंबर से न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में दिन का तापमान सामान्य से पांच डिग्री कम रहा। दिन में धूप 5.1 घंटे धूप खिलने से लोगों को ठंड से कुछ राहत मिली।
ये है हिसार का रिकाॅर्ड
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले 10 साल में हिसार में दिसंबर का रात का तापमान दो बार माइनस और दो बार जीरो के आस-पास रहा है। 26 दिसंबर 2018 को -1 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा था। 28 और 29 दिसंबर 2019 को पारा 0.2 डिग्री, 29 दिसंबर 2013 को -0.8 डिग्री, 25 दिसंबर 2011 को 0.0 डिग्री तापमान रहा था, जो कि अब तक का रिकाॅर्ड है।
21-22 को धुंध देगी
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे ही शीतलहर व पाले का प्रकोप कम होगा, 21-22 से प्रदेश के कुछ इलाकों में धुंध दस्तक देगी। 21 से दिन के तापमान में चार से पांच डिग्री बढ़ोत्तरी की संभावना है।
ऐसे जमता है पाला
सर्द मौसम में जब तापमान हिमांक पर या इससे नीचे चला जाता है तब वायु में उपस्थित जलवाष्प बन द्रव रूप में परिवर्तित न होकर सूक्ष्म हिमकणों में परिवर्तित हो जाते हैं। इसे ही पाला पड़ना या बर्फ जमना कहा जाता है।
अधिक पश्चिमी विक्षोभों ने बढ़ाई ठंड
अबकी बार दिसंबर में कई पश्चिमी विक्षोभ आ चुके हैं। इनका असर पहाड़ी इलाकों में अधिक रहा है। इनकी वजह से पहाड़ों में बर्फबारी हो रही है। ऐसे में ठंडक मैदानी इलाकों की ओर आने से इतना पारा कम हुआ है। -डॉ. सुरेंद्र पाल, निदेशक आईएमडी, चंडीगढ़