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मेरी गीत संग्रह “भूल पाता नहीं” से एक गीत, शीर्षक है “भारत सपूत”
मातृ भूमि की इस वेदी पर,
अर्पित अनेक जवानी है ।
कोटि प्रणाम सपूतों को ,
जिनकी यह अमर कहानी है ।।
जंजीरों में जकड़ी मां को,
आँख खोल सबने देखा ।
तनिक विलम्ब भी होता कैसे,
बदल गयी मस्तक रेखा ।।
देखा विपदा में मां को जब,
त्याग समर्पण भाव जगा ।
बलिदानी हर पूत धरा का,
आज हमें शूरवीर लगा ।।
ललक – ललककर कहे कौन है,
जो पीड़ित मां को करता ।
खैर नहीं उस देश द्रोह की
युग अब धकक -धधक उठता ।।